Bhadohi News: भदोही में प्रदर्शन के दौरान भाजपा नेता पर हमला? वायरल वीडियो के बाद सियासत गरम

 क्या लोकतंत्र में विरोध का अधिकार अब हिंसा में बदलता जा रहा है? क्या प्रदर्शन के नाम पर किसी नेता पर हमला, गाड़ी में तोड़फोड़ और पोस्टर फाड़ना स्वीकार किया जा सकता है? भदोही से सामने आई एक घटना ने कानून-व्यवस्था और राजनीतिक मर्यादा दोनों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आखिर उस दिन हुआ क्या? आइए समझते हैं पूरी कहानी…  उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के ज्ञानपुर स्थित काशी नरेश विश्वविद्यालय के पास शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन चल रहा था। इसी दौरान भारतीय जनता पार्टी के नेता विनय पांडे 'गोरेलाल' के साथ कथित रूप से धक्का-मुक्की होने, उनकी गाड़ी में तोड़फोड़ करने और वाहन पर लगा भाजपा का झंडा हटाकर फेंकने के आरोप सामने आए हैं। इतना ही नहीं, आरोप यह भी लगाया गया कि प्रदर्शन के दौरान योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पोस्टर फाड़े गए तथा प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र टिप्पणियां की गईं। इस पूरी घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि वायरल वीडियो और लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी जांच...

भदोही में फर्जी पुलिस कॉल से लेकर मुंबई तक उत्पीड़न | प्रशासन की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल |

 भदोही | विशेष रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश के भदोही जनपद से जुड़ा एक गंभीर मामला अब केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक निष्क्रियता और आम नागरिकों की सुरक्षा पर बड़ा प्रश्नचिह्न बन चुका है।

मामले में आरोप है कि थाना सुरियावां, जनपद भदोही के नाम पर फर्जी पुलिस कॉल कर अवैध रूप से पैसे की मांग की गई, वहीं शिकायत दर्ज होने के बावजूद आरोपी और उससे जुड़े लोग भदोही से लेकर मुंबई तक पीड़ित परिवार को लगातार प्रताड़ित कर रहे हैं।

bhadohi पुलिस अधीक्षक और पीड़ित बुजुर्ग  

पार्ट-1: फर्जी पुलिस कॉल और पैसे ऐंठने का प्रयास

पीड़ित विपिन शुक्ला, जो वर्तमान में मुंबई में रहकर रोज़गार कर रहे हैं, ने आरोप लगाया कि उनके मोबाइल नंबर पर +91 63895 36359 से कॉल आया। कॉल करने वाले ने स्वयं को थाना सुरियावां का पुलिसकर्मी “विक्रम” बताते हुए कहा—

“आपके नाम से नोटिस जारी हुआ है, थाना प्रभारी के निर्देश पर ऑनलाइन भुगतान करिए, तभी मामला निपटेगा।”

जब पीड़ित ने पूछा कि उसका नंबर कहां से मिला, तो कॉलर ने Instagram से नंबर मिलने का दावा किया, जबकि पीड़ित का Instagram अकाउंट ही मौजूद नहीं है।
इस पूरे प्रकरण के कॉल रिकॉर्ड, ट्रूकॉलर स्क्रीनशॉट और लिखित शिकायत प्रशासन को सौंपे गए।


पार्ट-2: मुंबई में कार्यस्थल तक धमकियाँ, दो NCR दर्ज

मामला यहीं नहीं रुका।
पीड़ित के अनुसार प्रमोद शुक्ला नामक व्यक्ति द्वारा लगातार उत्पीड़न, धमकी और डराने का सिलसिला जारी रहा।

  • 28 दिसंबर 2025 को आरोपी ने पीड़ित के निवास पर जाकर गाली-गलौज, धमकी और भय का माहौल बनाया

  • इस घटना पर NCR No. 3527/2025 (धारा 174, BNSS 2023) दर्ज हुई

  • लेकिन कोई ठोस निवारक कार्रवाई नहीं हुई

इसके बाद 02 जनवरी 2026 को आरोपी मुंबई में पीड़ित के कार्यस्थल पर पहुंचा—

  • सार्वजनिक रूप से अपमान

  • मारपीट की कोशिश

  • पीड़ित और उसके परिवार को जान से मारने की खुली धमकी

  • घटना के समय अन्य कर्मचारी और दो पुलिसकर्मी मौजूद, जिन्होंने स्थिति संभाली

इस पर दूसरी NCR No. 0022/2026 (धारा 351(2), 352 BNSS) दर्ज हुई।
पीड़ित के पास वीडियो साक्ष्य भी मौजूद हैं।


पार्ट-3: मुख्यमंत्री को भेजी रिपोर्ट में ‘व्यक्तिगत मामला’ बताकर लीपापोती?

सबसे गंभीर आरोप भदोही प्रशासन की आख्या को लेकर हैं, जो मुख्यमंत्री को भेजी गई।

पीड़ित पक्ष का कहना है कि रिपोर्ट में—

  • सरकारी अधिकारी बनकर पैसे मांगने जैसे संगीन अपराध को हल्के में लिया गया

  • बुजुर्ग को जान से मारने की धमकी को नज़रअंदाज़ किया गया

  • पूरे प्रकरण को “व्यक्तिगत विवाद” बताकर पल्ला झाड़ लिया गया

जबकि सच्चाई यह है कि—

किसी भी टेलिकॉम कॉल डिटेल, लोकेशन, या फर्जी नंबर की जाँच केवल प्रशासन ही करा सकता है।
फिर भी इस दिशा में कोई गंभीर जांच नहीं की गई।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि आरोपी के स्थानीय या जिला स्तर के कुछ पुलिस अधिकारियों से संबंध होने के कारण मामला दबाया जा रहा है।


भदोही से मुंबई तक फैली प्रताड़ना

पीड़ित परिवार का कहना है कि—

  • भदोही में वृद्ध माता-पिता को धमकियाँ, घर में घुसपैठ और अनाज उठाने जैसी घटनाएँ

  • मुंबई में पीड़ित को कार्यस्थल पर जाकर डराने-धमकाने की हिम्मत

  • आरोपी और उसके पारिवारिक सदस्यों द्वारा लगातार मानसिक आतंक

यह दर्शाता है कि अपराधियों को प्रशासन का भय नहीं, बल्कि संरक्षण का भरोसा है।


सवाल जो भदोही प्रशासन के सामने खड़े हैं

  • क्या भदोही में फर्जी पुलिस बनकर पैसे मांगना अब सामान्य बात हो गई है?

  • क्या बुजुर्गों की जान की धमकी भी “व्यक्तिगत मामला” है?

  • जब साक्ष्य निकालने की शक्ति सिर्फ प्रशासन के पास है, तो जाँच क्यों नहीं?

  • क्या प्रभावशाली संपर्क कानून से ऊपर हैं?


यह मामला केवल एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि भदोही जिले में कानून के इकबाल और प्रशासनिक इच्छाशक्ति की परीक्षा है।

यदि ऐसे मामलों में समय रहते निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई, तो समाज में भय और अपराधियों का मनोबल बढ़ना तय है।

अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि प्रशासन सच में न्याय करता है या फाइलों में सच्चाई दफन हो जाती है।

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