भदोही में पुल क्यों नहीं? चकटेकी–अबरना नदी संकट पर जिम्मेदार विभाग कौन, पूर्व-वर्तमान विधायक की चुप्पी पर सवाल
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क्या भदोही में हजारों लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी, बच्चों की पढ़ाई और किसानों की आवाजाही किसी की प्राथमिकता नहीं?
जब एक नदी पर पुल न होने से छह हजार से अधिक लोग रोज़ पाँच गांवों का चक्कर लगाने को मजबूर हों, तो जिम्मेदार कौन?
और सबसे बड़ा सवाल—जब यह मुद्दा पूर्व विधायक के गांव के बेहद पास का है, तो पूर्व और वर्तमान विधायक अब तक चुप क्यों?
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| फाइल फोटो : पूर्व विधायक रविन्द्र नाथ त्रिपाठी व वर्त्तमान विधायक जाहिद वेग |
मामला क्या है और समस्या कितनी बड़ी है
अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार अबरना–चकटेकी के बीच बहने वाली वरुणा नदी पर पुल न होने से भदोही के चकटेकी गांव के करीब छह हजार लोग रोज़ाना लंबा और जोखिम भरा रास्ता तय करते हैं।
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स्कूल जाने वाले बच्चे,
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खेती-किसानी और बाजार,
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स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच—
सब पर इसका सीधा असर पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि बरसात में स्थिति और भयावह हो जाती है। भदोही में यह समस्या वर्षों से चली आ रही है, लेकिन समाधान आज तक नहीं।
जिम्मेदार कौन-कौन से विभाग?
इस तरह के पुल निर्माण में सामान्यतः ये विभाग जिम्मेदार होते हैं:
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लोक निर्माण विभाग (PWD) / ग्रामीण अभियंत्रण विभाग
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जिला प्रशासन
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राज्य सरकार (वित्त व स्वीकृति)
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जनप्रतिनिधि (विधायक/सांसद) — जो प्रस्ताव को आगे बढ़ाते हैं
रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीणों ने कई बार मांग उठाई, पर भदोही में फाइलें आगे क्यों नहीं बढ़ीं—यह स्पष्ट नहीं।
राजनीतिक चुप्पी पर सवाल (तथ्यों के साथ प्रश्न)
यह क्षेत्र पूर्व विधायक रविंद्रनाथ त्रिपाठी के गांव चौगुना के बेहद पास बताया जा रहा है।
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यहीं से वे एक चुनाव जीतकर विधायक बने
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दूसरे चुनाव में भी इसी इलाके से जीत मिली
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वर्तमान में उनके भाई जिला अध्यक्ष के पद पर हैं
ऐसे में सवाल उठता है कि भदोही की इस गंभीर समस्या को अब तक प्राथमिकता क्यों नहीं मिली?
वहीं वर्तमान विधायक जाहिद बेग की ओर से भी इस मुद्दे पर सार्वजनिक पहल या आंदोलन न दिखने पर लोग सवाल पूछ रहे हैं।
यह रिपोर्ट किसी पर आरोप नहीं, बल्कि जनता के सवाल सामने रखती है—क्योंकि जनप्रतिनिधियों से जवाब अपेक्षित है।
भदोही के लिए यह सिर्फ पुल नहीं, अधिकार का सवाल
यह मुद्दा केवल एक पुल का नहीं, बल्कि भदोही में विकास की दिशा और प्राथमिकताओं का है।
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क्या विकास केवल भाषणों तक सीमित है?
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क्या गांवों की बुनियादी जरूरतें राजनीति की भेंट चढ़ जाती हैं?
भदोही के लोग यह जानना चाहते हैं कि उनके बच्चों की सुरक्षा, किसानों की सुविधा और मरीजों की समय पर मदद कब सुनिश्चित होगी।
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जागरूकता + मांग
अब समय है कि—
✔ जिला प्रशासन स्पष्ट टाइमलाइन जारी करे
✔ संबंधित विभाग पुल प्रस्ताव सार्वजनिक करें
✔ पूर्व और वर्तमान विधायक खुलकर स्थिति स्पष्ट करें
✔ भदोही की जनता के सवालों का लिखित जवाब दिया जाए
क्योंकि अगर जनप्रतिनिधि अपने ही गांव के पास की समस्या नहीं सुलझा पा रहे, तो जनता को जवाब मांगने का पूरा हक है।
आपके अनुसार भदोही में इस पुल निर्माण में सबसे बड़ी बाधा क्या है—प्रशासनिक लापरवाही, राजनीतिक चुप्पी, या इच्छाशक्ति की कमी? अपनी राय कमेंट में बताइए।
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